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Explore our collection of 82 beautiful poems
Ghazal
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🇮🇳 लो हम चले, लो हम चले 🇮🇳
माँ से विदाई
माँ, अपने आँचल से ये आँसू पोंछ ले तू,
माथे पे मेरे, विजय का तिलक लगा दे तू।
दूध का क़र्ज़ तो शायद मैं चुका न पाऊँ,
बस सर पे हाथ रख कर, एक दुआ दे दे तू।
तेरी ममता की छाँव को छोड़ कर,
फ़र...
माँ, अपने आँचल से ये आँसू पोंछ ले तू,
माथे पे मेरे, विजय का तिलक लगा दे तू।
दूध का क़र्ज़ तो शायद मैं चुका न पाऊँ,
बस सर पे हाथ रख कर, एक दुआ दे दे तू।
तेरी ममता की छाँव को छोड़ कर,
फ़र...
Rubai
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बाक़ी बातें बाद में...
शाम का वक़्त हो, और हल्की सी ठंडी हवा हो जाए,
बस हम दोनों बैठे हों, और शोर थोड़ा कम हो जाए,
तुम बस मुस्कुराते हुए किचन से, वो भाप निकलता प्याला ले आओ,
बाक़ी बातें बाद में, पहले एक तुम्हारे हाथों की चा...
बस हम दोनों बैठे हों, और शोर थोड़ा कम हो जाए,
तुम बस मुस्कुराते हुए किचन से, वो भाप निकलता प्याला ले आओ,
बाक़ी बातें बाद में, पहले एक तुम्हारे हाथों की चा...
Ghazal
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बच्चे की जान लोगी क्या? 😉😍
यूँ बन-संवर के छत पे आना, अब बस भी करो,
पूरे मोहल्ले का 'बीपी' (BP) बढ़ाना, अब बस भी करो।
तुम्हारी एक स्माइल से हो गया हूँ मैं 'शुगर' का मरीज़,
यूँ चाय में उंगली डुबो कर, उसे मीठा बनाना अब बस भी करो...
पूरे मोहल्ले का 'बीपी' (BP) बढ़ाना, अब बस भी करो।
तुम्हारी एक स्माइल से हो गया हूँ मैं 'शुगर' का मरीज़,
यूँ चाय में उंगली डुबो कर, उसे मीठा बनाना अब बस भी करो...
Nazm
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माँ,
इस छोटे से कमरे में, कैसी ये वीरानी छाई है माँ,
आज फिर इस काली रात में, तेरी बहुत याद आई है माँ।
बुख़ार से तप रहा है बदन, और पानी पूछने वाला कोई नहीं,
मेरे माथे पर तेरे ठंडे हाथ की, वो नरमी याद आई ...
आज फिर इस काली रात में, तेरी बहुत याद आई है माँ।
बुख़ार से तप रहा है बदन, और पानी पूछने वाला कोई नहीं,
मेरे माथे पर तेरे ठंडे हाथ की, वो नरमी याद आई ...
Nazm
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इंसान नहीं, किरदार हो तुम
चेहरे पे चेहरा लगाते हो, बड़े अदाकार हो तुम,
सच कहूँ तो इंसान नहीं, बस एक किरदार हो तुम।
अपनी मर्ज़ी से कहाँ एक साँस भी लेते हो यहाँ?
ज़माने के हाथों में, बिकने वाले अख़बार हो तुम।
तुम्हें लगता है क...
सच कहूँ तो इंसान नहीं, बस एक किरदार हो तुम।
अपनी मर्ज़ी से कहाँ एक साँस भी लेते हो यहाँ?
ज़माने के हाथों में, बिकने वाले अख़बार हो तुम।
तुम्हें लगता है क...
Nazm
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अपूर्ण हो तुम
कान्हा, भ्रम में मत रहना...
कि तुम 'पूर्ण' हो।
ज़रा अपने नाम के आगे से मेरा नाम हटाकर तो देखो,
तुम 'राधा-कृष्ण' से घटकर... महज़ एक 'किस्सा' रह जाओगे।
संसार तुम्हें 'ईश्वर' कहता है,
पर भूलना मत...
...
कि तुम 'पूर्ण' हो।
ज़रा अपने नाम के आगे से मेरा नाम हटाकर तो देखो,
तुम 'राधा-कृष्ण' से घटकर... महज़ एक 'किस्सा' रह जाओगे।
संसार तुम्हें 'ईश्वर' कहता है,
पर भूलना मत...
...
Nazm
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मेरी प्यारी माँ
आज फिर वही तारीख है...
वो दिन, जब मेरे सर से 'छत' और पैरों के नीचे से 'ज़मीन' एक साथ खिसक गई थी।
सब कहते हैं कि वक़्त के साथ सब ठीक हो जाता है,
पर माँ... झूठ कहते हैं वो।
वक़्त सिर्फ़ आंसू छुपाना सिखा...
वो दिन, जब मेरे सर से 'छत' और पैरों के नीचे से 'ज़मीन' एक साथ खिसक गई थी।
सब कहते हैं कि वक़्त के साथ सब ठीक हो जाता है,
पर माँ... झूठ कहते हैं वो।
वक़्त सिर्फ़ आंसू छुपाना सिखा...
Nazm
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तुम, मैं और हमारा अनंत प्रेम
तुम मेरे कृष्णा, मैं तुम्हारी राधा,
तुमसे ही जुड़ी है मेरी हर एक बाधा।
संसार के लिए तुम पूजनीय भगवान हो,
पर मेरे लिए... तुम मेरा अभिमान हो।
सुनो...
तुम अगर 'मौन' हो, तो मैं तुम्हारी 'भाषा' हूँ,
...
तुमसे ही जुड़ी है मेरी हर एक बाधा।
संसार के लिए तुम पूजनीय भगवान हो,
पर मेरे लिए... तुम मेरा अभिमान हो।
सुनो...
तुम अगर 'मौन' हो, तो मैं तुम्हारी 'भाषा' हूँ,
...
Rubai
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राख
राख में दबी चिंगारी कुरेदते क्यों हो?
जो भूल चुके हैं हमें, उन्हें ढूँढ़ते क्यों हो?
यह दिल तो कब का बन चुका है पत्थर दोस्तों,
अब इसके टूटने की आवाज़ सुनना चाहते क्यों हो?
जो भूल चुके हैं हमें, उन्हें ढूँढ़ते क्यों हो?
यह दिल तो कब का बन चुका है पत्थर दोस्तों,
अब इसके टूटने की आवाज़ सुनना चाहते क्यों हो?
Ghazal
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आसान नहीं होता
हर दर्द-ए-दिल ज़ुबाँ से बयाँ नहीं होता,
मोहब्बत का सफ़र इतना आसान नहीं होता।
हँसी के पीछे छुपा लेती है दुनिया ग़म को,
हर ज़ख्म का जिस्म पर निशान नहीं होता।
ज़मीन वालों की ख्वाहिशें बहुत हैं मगर...
मोहब्बत का सफ़र इतना आसान नहीं होता।
हँसी के पीछे छुपा लेती है दुनिया ग़म को,
हर ज़ख्म का जिस्म पर निशान नहीं होता।
ज़मीन वालों की ख्वाहिशें बहुत हैं मगर...
Ghazal
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"हवा की तरह"
मिला वो राह में अक्सर हवा की तरह,
गुज़र गया वो फिर इक बेवफ़ा की तरह।
तेरे बगैर ये कैसी है ज़िंदगी मेरी,
मिली है साँस भी मुझको सज़ा की तरह।
मैं हाथ फैला के माँगता रहा जिसको,
वो पेश आया है मुझसे ...
गुज़र गया वो फिर इक बेवफ़ा की तरह।
तेरे बगैर ये कैसी है ज़िंदगी मेरी,
मिली है साँस भी मुझको सज़ा की तरह।
मैं हाथ फैला के माँगता रहा जिसको,
वो पेश आया है मुझसे ...
Ghazal
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शुरू होने से पहले
तुझे खोने का डर था पाने से पहले,
ख़त्म किस्सा हुआ शुरू होने से पहले।
बहुत रोए हैं हम मुस्कुराने से पहले,
ज़रा सोचो किसी का दिल दुखाने से पहले।
खबर होती अगर ये अंजाम-ए-मोहब्बत,
मुकर जाते कसम हम खा...
ख़त्म किस्सा हुआ शुरू होने से पहले।
बहुत रोए हैं हम मुस्कुराने से पहले,
ज़रा सोचो किसी का दिल दुखाने से पहले।
खबर होती अगर ये अंजाम-ए-मोहब्बत,
मुकर जाते कसम हम खा...