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रुबाई

वो ख्वाब था बिखर गया, ख्याल रह गया,
दिल में बस एक दबे पाँव सवाल रह गया।
हमने तो चाहा था उन्हें ज़िंदगी से बढ़कर,
अब उनके जाने का बस एक मलाल रह गया।
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बाक़ी बातें बाद में...

शाम का वक़्त हो, और हल्की सी ठंडी हवा हो जाए,
बस हम दोनों बैठे हों, और शोर थोड़ा कम हो जाए,
तुम बस मुस्कुराते हुए किचन से, वो भाप निकलता प्याला ले आओ,
बाक़ी बातें बाद में, पहले एक तुम्हारे हाथों की चा...
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राख

राख में दबी चिंगारी कुरेदते क्यों हो?
जो भूल चुके हैं हमें, उन्हें ढूँढ़ते क्यों हो?
यह दिल तो कब का बन चुका है पत्थर दोस्तों,
अब इसके टूटने की आवाज़ सुनना चाहते क्यों हो?