EXPLORE
Poetry Categories
Discover poetry in different forms and styles
HANDPICKED
Featured Poems
Masterpieces from our collection
Featured
Ghazal
शायरी की दुकान नहीं होती
लफ़्ज़ों को जोड़ना तो बस एक हुनर है दुनिया का,
मगर याद रखना, एहसास की कोई दुकान नहीं होती।
कलेजा चाहिए होता है लफ़्ज़ों में आग भरने को,
हर किसी के मुँह में ऐसी तासीर-ए-ज़ुबान नहीं होती।
ये वो दौलत है...
मगर याद रखना, एहसास की कोई दुकान नहीं होती।
कलेजा चाहिए होता है लफ़्ज़ों में आग भरने को,
हर किसी के मुँह में ऐसी तासीर-ए-ज़ुबान नहीं होती।
ये वो दौलत है...
Featured
Rubai
राख
राख में दबी चिंगारी कुरेदते क्यों हो?
जो भूल चुके हैं हमें, उन्हें ढूँढ़ते क्यों हो?
यह दिल तो कब का बन चुका है पत्थर दोस्तों,
अब इसके टूटने की आवाज़ सुनना चाहते क्यों हो?
जो भूल चुके हैं हमें, उन्हें ढूँढ़ते क्यों हो?
यह दिल तो कब का बन चुका है पत्थर दोस्तों,
अब इसके टूटने की आवाज़ सुनना चाहते क्यों हो?
Featured
Ghazal
शुरू होने से पहले
तुझे खोने का डर था पाने से पहले,
ख़त्म किस्सा हुआ शुरू होने से पहले।
बहुत रोए हैं हम मुस्कुराने से पहले,
ज़रा सोचो किसी का दिल दुखाने से पहले।
खबर होती अगर ये अंजाम-ए-मोहब्बत,
मुकर जाते कसम हम खा...
ख़त्म किस्सा हुआ शुरू होने से पहले।
बहुत रोए हैं हम मुस्कुराने से पहले,
ज़रा सोचो किसी का दिल दुखाने से पहले।
खबर होती अगर ये अंजाम-ए-मोहब्बत,
मुकर जाते कसम हम खा...
RECENTLY ADDED
Latest Poems
Fresh poetry from our talented community
Nazm
Start Reading
मौत की राजधानी
ये कैसा 'कोहरा' है जो अब छंटता नहीं,
सूरज भी अब इस शहर में निकलता नहीं।
हवाओं में यह कैसी ज़हर की मिलावट है,
साँस लेना भी अब तो, एक बगावत है।
सुनों ए तख्त पर बैठे हुए 'सियासत के खुदाओ',
जरा शीश...
सूरज भी अब इस शहर में निकलता नहीं।
हवाओं में यह कैसी ज़हर की मिलावट है,
साँस लेना भी अब तो, एक बगावत है।
सुनों ए तख्त पर बैठे हुए 'सियासत के खुदाओ',
जरा शीश...
Ghazal
Start Reading
दर्द का कोई बाज़ार नहीं
हुनर लफ़्ज़ों का बाज़ार में बिक सकता है बेशक,
मगर एहसास का दुनिया में कोई बाज़ार नहीं होता।
ये वो दौलत है जो रूह के जलने से मिलती है,
शायर कभी साँचे में ढल कर तैयार नहीं होता।
कलम घिसने से अगर कोई...
मगर एहसास का दुनिया में कोई बाज़ार नहीं होता।
ये वो दौलत है जो रूह के जलने से मिलती है,
शायर कभी साँचे में ढल कर तैयार नहीं होता।
कलम घिसने से अगर कोई...
Ghazal
Start Reading
शायरी की दुकान नहीं होती
लफ़्ज़ों को जोड़ना तो बस एक हुनर है दुनिया का,
मगर याद रखना, एहसास की कोई दुकान नहीं होती।
कलेजा चाहिए होता है लफ़्ज़ों में आग भरने को,
हर किसी के मुँह में ऐसी तासीर-ए-ज़ुबान नहीं होती।
ये वो दौलत है...
मगर याद रखना, एहसास की कोई दुकान नहीं होती।
कलेजा चाहिए होता है लफ़्ज़ों में आग भरने को,
हर किसी के मुँह में ऐसी तासीर-ए-ज़ुबान नहीं होती।
ये वो दौलत है...
Ghazal
Start Reading
आखिर कौन हो तुम?
मेरे दिल में गूँजता हुआ, एक सवाल हो तुम,
हकीकत हो मेरी, या सिर्फ एक खयाल हो तुम।
कभी लगता है कि सदियों पुरानी पहचान है तुमसे,
कभी लगता है कि बिल्कुल ही, अनजान हो तुम।
मेरे सूने से दिल में मचा, एक ...
हकीकत हो मेरी, या सिर्फ एक खयाल हो तुम।
कभी लगता है कि सदियों पुरानी पहचान है तुमसे,
कभी लगता है कि बिल्कुल ही, अनजान हो तुम।
मेरे सूने से दिल में मचा, एक ...
Ghazal
Start Reading
जीना सीख लिया
ठोकरें खाकर हमने सँभलना सीख लिया,
भीड़ में रहकर भी अकेले चलना सीख लिया।
कोई सुनता नहीं यहाँ चीखें किसी के दिल की,
हमने अब अपने दर्दों को सहना सीख लिया।
बहुत देखे हैं गिरगिट की तरह रंग बदलते लो...
भीड़ में रहकर भी अकेले चलना सीख लिया।
कोई सुनता नहीं यहाँ चीखें किसी के दिल की,
हमने अब अपने दर्दों को सहना सीख लिया।
बहुत देखे हैं गिरगिट की तरह रंग बदलते लो...
Ghazal
Start Reading
भरोसा मर गया
वो शख्स जो कभी जान था, दिल से उतर गया,
जब काम निकल गया, वो वादे से मुकर गया।
काँच की तरह सँभाल के रखा था रिश्ता हमने,
एक ठेस लगी और सब कुछ बिखर गया।
भीड़ में तो दिखता हूँ मैं हँसता हुआ मगर,
क...
जब काम निकल गया, वो वादे से मुकर गया।
काँच की तरह सँभाल के रखा था रिश्ता हमने,
एक ठेस लगी और सब कुछ बिखर गया।
भीड़ में तो दिखता हूँ मैं हँसता हुआ मगर,
क...
Share Your Poetry with the World
Join our community of poets and let your words inspire others