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Explore our collection of 82 beautiful poems

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सौदा नहीं किया

इसमें एक ऐसे इंसान की ज़िद है जिसने अपनी भावनाओं और उसूलों को दुनिया के लालच में बिकने नहीं दिया

लाख आए ख़रीदार, मगर सौदा नहीं किया,
हमने दिल को दिल रखा, बाज़ार नहीं होने दिया।
बिक गए लोग यहाँ, चं...
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सौदा-ए-ज़िंदगी

इक उम्र गुज़ार दी हमने, इक नई उम्र पाने में,
अब कोसते हैं उसी वक़्त को, जो गंवाया ज़माने में।
कल के सुकून की ख़ातिर, हमने आज को गिरवी रख दिया,
पूरी जवानी फूँक दी, बुढ़ापे का बिस्तर सजाने में।

सो...
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दर्द का कारोबार

तेरे जाने के बाद, शायरी का कारोबार चलने लग गया,
हर महफ़िल में अब, मेरे नाम का जाम चलने लग गया।
तूने सोचा था कि टूट कर बिखर जाऊँगा मैं तन्हाई में,
मगर देख, मेरे आंसुओं का ही दाम चलने लग गया।

एक फ...
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रहम-ओ-करम

जब एक इंसान दूसरों का दर्द बाँटते-बाँटते खुद खाली हो जाता है, तो उसे सिर्फ़ ऊपर वाले की 'रहमत' की आस होती है।
उसी 'दुआ' और 'पुकार के अंदाज़ में यह शायरी पेश है

इस भरे जहान में, बस एक इनायत चाहिए,
...
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यानी... तुम अब भी?

अब मेरा हाल पूछने आए हो? कमाल करते हो!
मैंने तो सब भुला दिया, तुम क्यों मलाल करते हो?
वो जो एक शख़्स था, वो कब का मर गया मुझ में,
तुम अब क़ब्र पर आकर, क्यों आँखें लाल करते हो?

छोड़ो... जाने दो.....
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सुकून-ए-दीदार

हज़ारों उलझनें हैं ज़हन में, मगर सब भूल जाता हूँ,
मैं उसको देख लूँ पल भर, तो दिल को सुकून आए।

भटकता हूँ मैं दिन भर धूप में दुनिया की गलियों में,
शाम को उसका चेहरा नज़र आए, तो दिल को सुकून आए।

...
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जाम और यादें 🍷

हर रोज़ ज़हर के घूँट पीकर, मैं रोज़ मरता हूँ,
ख़बर न लग जाए किसी को, इसलिए आहिस्ता चलता हूँ।
किसी की याद ने पिछले चौराहे पे बोतल खुलवा दी,
अब उस रास्ते से गुज़रता हूँ, तो बस फिसलता हूँ।

नशा तो म...
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ज़मीर का आईना

"माफ़ी कीजिये", कह कर वो बड़ी सादगी से मुस्कुराये,
जैसे खंजर छुपा रखा हो अपनी आस्तीन के ठिकाने में।
उजाड़ कर किसी का जहाँ, वो जश्न मनाते हैं,
कहते हैं, "ज़िंदा हूँ मैं", बड़े फख्र से ज़माने में।

...
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गुज़रा ज़माना

आज बैठिये, शुक्रिया महफ़िल में आने में,
जाम पीजिये और चले जाइये गुज़रे ज़माने में।
वो जो कभी इंतेज़ार में रहती थी तुम्हारे,
अब किसी और का वक़्त पूछती है घर आने में।

तुम्हें गुरूर था अपने हुनर पे...
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एनिवर्सरी मुबारक

आज फिर से मुबारकबाद देने का दिन आया है,
वाह भाई! तुमने एक और साल कामयाबी से निभाया है!
कल तक जो बंदा दोस्तों की महफ़िल की शान था,
आज "सब्ज़ी ले आना" पे घर भागा आया है।

भाभी जी की 'हां' में 'हां'...
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पेग

सुकून तो मिलता है महफ़िलें जमाने में,
मगर अकेले पीता है वीडियो कॉल पे इस ज़माने में।
दिल तो जलता है उसकी गैर-हाज़िरी से,
आग लगे तेरी यादों को, हम तो पीते हैं सर्दी भगाने में।

दिन की थकान, ऑफ़िस ...
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गाँव का तहख़ाना

उम्र गुज़र जाएगी मेरी इस शहर के ज़माने में,
फिर लौटकर जाऊँगा मैं, फिर उसी मेरे गाँव के तहख़ाने में।
यहाँ की रौनक़ें सब ख़्वाब हैं, सब खोखले से हैं,
वो जो 'सच' है, वो रखा है उसी पुराने में।

जहाँ ...