Rubai

बाक़ी बातें बाद में...

10 views December 12, 2025
शाम का वक़्त हो, और हल्की सी ठंडी हवा हो जाए,
बस हम दोनों बैठे हों, और शोर थोड़ा कम हो जाए,
तुम बस मुस्कुराते हुए किचन से, वो भाप निकलता प्याला ले आओ,
बाक़ी बातें बाद में, पहले एक तुम्हारे हाथों की चाय हो जाए।

तुम्हारे पास बैठने का, मुझे बस एक बहाना मिले,
इस भागम-भाग ज़िंदगी में, थोड़ा सा ठिकाना मिले,
इस भटकते हुए दिल को, आज थोड़ी सी पनाह हो जाए,
बाक़ी बातें बाद में, पहले एक तुम्हारे हाथों की चाय हो जाए।

वो अदरक की हल्की सी ख़ुशबू, पूरे घर में बिखर रही है,
तेरी सादगी इस शाम में, और भी ज़्यादा निखर रही है,
तुम्हारी उंगलियों का वो जादू, मेरे दिल की दवा हो जाए,
बाक़ी बातें बाद में, पहले एक तुम्हारे हाथों की चाय हो जाए।

मैं धीरे-धीरे पियूँगा, तुम बस मुझे देखती रहना,
कुछ मत बोलना जुबां से, बस आँखों से कहती रहना,
'ज़िगर शायर' चाहता है कि ये शाम, हम दोनों के नाम फ़ना हो जाए,
बाक़ी बातें बाद में, पहले एक तुम्हारे हाथों की चाय हो जाए।

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