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Explore our collection of 56 beautiful poems
Ghazal
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चिता
मुझे शमशानों की राख ने बनाया है,
मेरे अलफ़ाज़ को मुर्दों ने ही सिखाया है।
वो दूध जो तुम ज़िंदों को नसीब न होगा,
वो मुर्दों ने मुझे बचपन में पिलाया है।
बदन को सर्दी मिटाने की क्या ज़रूरत है,
ज...
मेरे अलफ़ाज़ को मुर्दों ने ही सिखाया है।
वो दूध जो तुम ज़िंदों को नसीब न होगा,
वो मुर्दों ने मुझे बचपन में पिलाया है।
बदन को सर्दी मिटाने की क्या ज़रूरत है,
ज...
Ghazal
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ससुराल का जाड़ा
वहाँ आलस था, यहाँ फ़र्ज़ निभाना पड़ता है,
ये सर्दी हो कि गर्मी, रोज़ नहाना पड़ता है।
रज़ाई छोड़ के मायके में कौन उठता था,
यहाँ सासू जी से पहले जाग जाना पड़ता है।
पहन के सूट पे मैचिंग का शॉल ले...
ये सर्दी हो कि गर्मी, रोज़ नहाना पड़ता है।
रज़ाई छोड़ के मायके में कौन उठता था,
यहाँ सासू जी से पहले जाग जाना पड़ता है।
पहन के सूट पे मैचिंग का शॉल ले...
Ghazal
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तुम क्या चाहती हो?
तुम अपने ज़हन में, कितनी बात छुपाती हो,
खामोश रह कर भी, न जाने क्या-क्या बताती हो।
मेरे अहसास को तोलकर, मेरे लिए नई दुनिया सजाती हो,
मगर लबों से हक़ीक़त, कहने से कतराती हो।
आँखों में तो समंदर भर...
खामोश रह कर भी, न जाने क्या-क्या बताती हो।
मेरे अहसास को तोलकर, मेरे लिए नई दुनिया सजाती हो,
मगर लबों से हक़ीक़त, कहने से कतराती हो।
आँखों में तो समंदर भर...
Ghazal
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मैं जिगर रखता हूँ
हवाओं से लड़ने का, मैं अजब हुनर रखता हूँ,
अंधेरों में भी खुद को जलाने का, जिगर रखता हूँ।
थक कर बैठ जाना, मेरी फ़ितरत में नहीं शामिल,
मैं काँटों पे भी नंगे पाँव चलने का, सफ़र रखता हूँ।
ये शोहरत, ये ...
अंधेरों में भी खुद को जलाने का, जिगर रखता हूँ।
थक कर बैठ जाना, मेरी फ़ितरत में नहीं शामिल,
मैं काँटों पे भी नंगे पाँव चलने का, सफ़र रखता हूँ।
ये शोहरत, ये ...
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मैं वो सूरज
खैरात में मिली हुई रौशनी, मुझे अंधी कर देती है,
मैं वो सूरज हूँ, जो किसी और के अम्बर से उगा नहीं।
तुझे गुमान है कि तेरी लहरें मुझे डुबो देंगी?
मैं वो जज़ीरा (जमीन) हूँ, जो समंदर से कभी छुपा नहीं।
...
मैं वो सूरज हूँ, जो किसी और के अम्बर से उगा नहीं।
तुझे गुमान है कि तेरी लहरें मुझे डुबो देंगी?
मैं वो जज़ीरा (जमीन) हूँ, जो समंदर से कभी छुपा नहीं।
...
Ghazal
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मेरा वजूद (My Existence) 🔥✊
आँधियाँ लाख आएँ, मैं अपनी जगह से हिला नहीं,
मैं वो पेड़ हूँ, जो तूफानों से कभी मिला नहीं।
मेरे सर को झुकाने की हसरत लिए बैठे हैं सब,
मगर मेरी गर्दन में, झुकने का कोई सिलसिला नहीं।
मैं अपनी पहचान ...
मैं वो पेड़ हूँ, जो तूफानों से कभी मिला नहीं।
मेरे सर को झुकाने की हसरत लिए बैठे हैं सब,
मगर मेरी गर्दन में, झुकने का कोई सिलसिला नहीं।
मैं अपनी पहचान ...
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🚬 सिगरेट और वफ़ा 🚬
तेरी यादें जब भी सीने में शोर मचाती हैं,
मैं ख़ामोशी से एक सिगरेट जला लेता हूँ।
तेरे होठों की तलब, अब कहाँ पूरी होती है?
अब तो इस जलती हुई 'लौ' को, मुँह से लगा लेता हूँ।
तू तो छोड़ गई थी मुझे, आ...
मैं ख़ामोशी से एक सिगरेट जला लेता हूँ।
तेरे होठों की तलब, अब कहाँ पूरी होती है?
अब तो इस जलती हुई 'लौ' को, मुँह से लगा लेता हूँ।
तू तो छोड़ गई थी मुझे, आ...
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🇮🇳 लो हम चले, लो हम चले 🇮🇳
माँ से विदाई
माँ, अपने आँचल से ये आँसू पोंछ ले तू,
माथे पे मेरे, विजय का तिलक लगा दे तू।
दूध का क़र्ज़ तो शायद मैं चुका न पाऊँ,
बस सर पे हाथ रख कर, एक दुआ दे दे तू।
तेरी ममता की छाँव को छोड़ कर,
फ़र...
माँ, अपने आँचल से ये आँसू पोंछ ले तू,
माथे पे मेरे, विजय का तिलक लगा दे तू।
दूध का क़र्ज़ तो शायद मैं चुका न पाऊँ,
बस सर पे हाथ रख कर, एक दुआ दे दे तू।
तेरी ममता की छाँव को छोड़ कर,
फ़र...
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बच्चे की जान लोगी क्या? 😉😍
यूँ बन-संवर के छत पे आना, अब बस भी करो,
पूरे मोहल्ले का 'बीपी' (BP) बढ़ाना, अब बस भी करो।
तुम्हारी एक स्माइल से हो गया हूँ मैं 'शुगर' का मरीज़,
यूँ चाय में उंगली डुबो कर, उसे मीठा बनाना अब बस भी करो...
पूरे मोहल्ले का 'बीपी' (BP) बढ़ाना, अब बस भी करो।
तुम्हारी एक स्माइल से हो गया हूँ मैं 'शुगर' का मरीज़,
यूँ चाय में उंगली डुबो कर, उसे मीठा बनाना अब बस भी करो...
Ghazal
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वैरागी की प्रेम-कथा
तुम्हें क्या लगता है,
आसान था एक 'योगी' से प्रेम करना?
वो, जो अपनी ही धुन में,
संसार से कटा हुआ,
बर्फ की चट्टानों पर बैठा था...
आँखें मूंदे, दुनिया से बेखबर।
सबने कहा— "वो वैरागी है,
उसके पा...
आसान था एक 'योगी' से प्रेम करना?
वो, जो अपनी ही धुन में,
संसार से कटा हुआ,
बर्फ की चट्टानों पर बैठा था...
आँखें मूंदे, दुनिया से बेखबर।
सबने कहा— "वो वैरागी है,
उसके पा...
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सुलगते लोग और मेरी नींदें
ये लाल आँखें, ये बे-नींद रातें, सब मेरी 'मेहनत' की निशानी है,
दुनिया की 'पिछवाड़े' की आग से तो, ये कई गुना बेहतर कहानी है।
मेरी आँखों में जलन है, क्योंकि मेरे सपने बड़े हैं,
तेरी 'तशरीफ़' में जलन ह...
दुनिया की 'पिछवाड़े' की आग से तो, ये कई गुना बेहतर कहानी है।
मेरी आँखों में जलन है, क्योंकि मेरे सपने बड़े हैं,
तेरी 'तशरीफ़' में जलन ह...
Ghazal
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तबाही का सुकून
बड़े सलीके से, बड़ी खामोशी के साथ,
अपनी ही खुशियों को करके आज़ाद,
कर रहा हूँ खुद को बर्बाद।
बना सकता था मैं भी महल, जोड़ सकता था मैं भी रिश्ते,
मगर अपने ही हाथों, हिलाकर अपनी बुनियाद,
कर रहा हूँ ...
अपनी ही खुशियों को करके आज़ाद,
कर रहा हूँ खुद को बर्बाद।
बना सकता था मैं भी महल, जोड़ सकता था मैं भी रिश्ते,
मगर अपने ही हाथों, हिलाकर अपनी बुनियाद,
कर रहा हूँ ...