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मौत की राजधानी

ये कैसा 'कोहरा' है जो अब छंटता नहीं,
सूरज भी अब इस शहर में निकलता नहीं।
हवाओं में यह कैसी ज़हर की मिलावट है,
साँस लेना भी अब तो, एक बगावत है।

सुनों ए तख्त पर बैठे हुए 'सियासत के खुदाओ',
जरा शीश...

दर्द का कोई बाज़ार नहीं

हुनर लफ़्ज़ों का बाज़ार में बिक सकता है बेशक,
मगर एहसास का दुनिया में कोई बाज़ार नहीं होता।
ये वो दौलत है जो रूह के जलने से मिलती है,
शायर कभी साँचे में ढल कर तैयार नहीं होता।
कलम घिसने से अगर कोई...

शायरी की दुकान नहीं होती

​लफ़्ज़ों को जोड़ना तो बस एक हुनर है दुनिया का,
मगर याद रखना, एहसास की कोई दुकान नहीं होती।
​कलेजा चाहिए होता है लफ़्ज़ों में आग भरने को,
हर किसी के मुँह में ऐसी तासीर-ए-ज़ुबान नहीं होती।
​ये वो दौलत है...

आखिर कौन हो तुम?

मेरे दिल में गूँजता हुआ, एक सवाल हो तुम,
हकीकत हो मेरी, या सिर्फ एक खयाल हो तुम।
कभी लगता है कि सदियों पुरानी पहचान है तुमसे,
कभी लगता है कि बिल्कुल ही, अनजान हो तुम।
मेरे सूने से दिल में मचा, एक ...

जीना सीख लिया

ठोकरें खाकर हमने सँभलना सीख लिया,
भीड़ में रहकर भी अकेले चलना सीख लिया।

कोई सुनता नहीं यहाँ चीखें किसी के दिल की,
हमने अब अपने दर्दों को सहना सीख लिया।

बहुत देखे हैं गिरगिट की तरह रंग बदलते लो...

भरोसा मर गया

वो शख्स जो कभी जान था, दिल से उतर गया,
जब काम निकल गया, वो वादे से मुकर गया।

काँच की तरह सँभाल के रखा था रिश्ता हमने,
एक ठेस लगी और सब कुछ बिखर गया।

भीड़ में तो दिखता हूँ मैं हँसता हुआ मगर,
क...

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