Ghazal

"हवा की तरह"

14 views January 1, 1970
मिला वो राह में अक्सर हवा की तरह,
गुज़र गया वो फिर इक बेवफ़ा की तरह।
​तेरे बगैर ये कैसी है ज़िंदगी मेरी,
मिली है साँस भी मुझको सज़ा की तरह।
​मैं हाथ फैला के माँगता रहा जिसको,
वो पेश आया है मुझसे ख़ुदा की तरह।
​ज़रा सी ठेस लगी और बिखर गया वो दिल,
गिरा ज़मीन पे जो आइना की तरह।
​तमाम उम्र मेरे ज़ख्म भर नहीं पाए,
तेरा ख़याल भी निकला दवा की तरह।

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