Ghazal
हाँ मैं अहंकारी हूँ।
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December 12, 2025
जब लड़ रहा था मैं अकेले ज़िन्दगी के तूफ़ानों से,
जब घिरा हुआ था मैं मतलबपरस्त इंसानों से,
मैं अपने ही ग़मों का एक अकेला व्यापारी हूँ,
अगर इसे कहते हो खुद्दारी, तो हाँ मैं अहंकारी हूँ।
तब कहाँ थे ये मेरे अपने और मेरे रिश्तेदार?
जब बंद थे मुझ पर दुनिया के सारे दरवाज़े-चार,
मैं बस अपनी ही हिम्मत का अकेला एक पुजारी हूँ,
अगर इसे कहते हो खुद्दारी, तो हाँ मैं अहंकारी हूँ।
अब जब मैं खड़ा हूँ, तो देते हो धरम-करम का ज्ञान,
अब याद आया है तुमको वो भूला हुआ ईमान,
तुम्हारी इस दिखावे की दुनियादारी का मैं शिकारी हूँ,
अगर इसे कहते हो खुद्दारी, तो हाँ मैं अहंकारी हूँ।
ये मेरा अपना है, ये मेरे अकेले का सफ़र,
मैंने ख़ुद उठाया है अपने सपनों का बोझ सर पर,
मैं बस उस ऊपरवाले का और ख़ुद का आभारी हूँ,
अगर इसे कहते हो खुद्कारी, तो हाँ मैं अहंकारी हूँ।
मैं अपनी मेहनत का क़र्ज़दार, बस उसी का आभारी हूँ,
अगर इसे कहते हो खुद्दारी, तो हाँ मैं अहंकारी हूँ।
जब घिरा हुआ था मैं मतलबपरस्त इंसानों से,
मैं अपने ही ग़मों का एक अकेला व्यापारी हूँ,
अगर इसे कहते हो खुद्दारी, तो हाँ मैं अहंकारी हूँ।
तब कहाँ थे ये मेरे अपने और मेरे रिश्तेदार?
जब बंद थे मुझ पर दुनिया के सारे दरवाज़े-चार,
मैं बस अपनी ही हिम्मत का अकेला एक पुजारी हूँ,
अगर इसे कहते हो खुद्दारी, तो हाँ मैं अहंकारी हूँ।
अब जब मैं खड़ा हूँ, तो देते हो धरम-करम का ज्ञान,
अब याद आया है तुमको वो भूला हुआ ईमान,
तुम्हारी इस दिखावे की दुनियादारी का मैं शिकारी हूँ,
अगर इसे कहते हो खुद्दारी, तो हाँ मैं अहंकारी हूँ।
ये मेरा अपना है, ये मेरे अकेले का सफ़र,
मैंने ख़ुद उठाया है अपने सपनों का बोझ सर पर,
मैं बस उस ऊपरवाले का और ख़ुद का आभारी हूँ,
अगर इसे कहते हो खुद्कारी, तो हाँ मैं अहंकारी हूँ।
मैं अपनी मेहनत का क़र्ज़दार, बस उसी का आभारी हूँ,
अगर इसे कहते हो खुद्दारी, तो हाँ मैं अहंकारी हूँ।
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