Ghazal
सुलगते लोग और मेरी नींदें
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January 1, 1970
ये लाल आँखें, ये बे-नींद रातें, सब मेरी 'मेहनत' की निशानी है,
दुनिया की 'पिछवाड़े' की आग से तो, ये कई गुना बेहतर कहानी है।
मेरी आँखों में जलन है, क्योंकि मेरे सपने बड़े हैं,
तेरी 'तशरीफ़' में जलन है, क्योंकि हम तुझसे आगे खड़े हैं।
जागना मंज़ूर है मुझे, अपने सुकून को खोकर,
कम से कम मैं जल तो नहीं रहा, किसी और का होकर।
दुनिया की 'पिछवाड़े' की आग से तो, ये कई गुना बेहतर कहानी है।
मेरी आँखों में जलन है, क्योंकि मेरे सपने बड़े हैं,
तेरी 'तशरीफ़' में जलन है, क्योंकि हम तुझसे आगे खड़े हैं।
जागना मंज़ूर है मुझे, अपने सुकून को खोकर,
कम से कम मैं जल तो नहीं रहा, किसी और का होकर।
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मगर एहसास का दुनिया में कोई बाज़ार नहीं होता।
ये वो दौलत है जो रूह के जल...
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लफ़्ज़ों को जोड़ना तो बस एक हुनर है दुनिया का,
मगर याद रखना, एहसास की कोई दुकान नहीं होती।
कलेजा चाहिए होता है लफ़्ज़ों म...
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कभी लगता है कि सदियों पुरानी पहचान है...
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