Ghazal
सौदा-ए-ज़िंदगी
19 views
December 12, 2025
इक उम्र गुज़ार दी हमने, इक नई उम्र पाने में,
अब कोसते हैं उसी वक़्त को, जो गंवाया ज़माने में।
कल के सुकून की ख़ातिर, हमने आज को गिरवी रख दिया,
पूरी जवानी फूँक दी, बुढ़ापे का बिस्तर सजाने में।
सोचा था दौड़ कर मंज़िल पे पहुँचेंगे, तो साँस लेंगे,
मगर साँसें ही फूल गईं, मंज़िल तक आने में।
घर तो पक्का बना लिया, मगर रिश्ते कच्चे रह गए,
हमनें ईंटें तो जोड़ लीं, मगर देर कर दी घर बसाने में।
जिस 'कल' की फ़िक्र में, हम ख़ुद को मारते रहे ता-उम्र,
वो 'कल' गुज़र गया, आज का मातम मनाने में।
ज़िगर शायर ने जीत ली दुनिया, मगर ज़िंदगी हार गया,
सब कुछ तो लुटा दिया, बस कुछ सिक्के कमाने में।
अब कोसते हैं उसी वक़्त को, जो गंवाया ज़माने में।
कल के सुकून की ख़ातिर, हमने आज को गिरवी रख दिया,
पूरी जवानी फूँक दी, बुढ़ापे का बिस्तर सजाने में।
सोचा था दौड़ कर मंज़िल पे पहुँचेंगे, तो साँस लेंगे,
मगर साँसें ही फूल गईं, मंज़िल तक आने में।
घर तो पक्का बना लिया, मगर रिश्ते कच्चे रह गए,
हमनें ईंटें तो जोड़ लीं, मगर देर कर दी घर बसाने में।
जिस 'कल' की फ़िक्र में, हम ख़ुद को मारते रहे ता-उम्र,
वो 'कल' गुज़र गया, आज का मातम मनाने में।
ज़िगर शायर ने जीत ली दुनिया, मगर ज़िंदगी हार गया,
सब कुछ तो लुटा दिया, बस कुछ सिक्के कमाने में।
Share This Poem
More from Ghazal
हुनर लफ़्ज़ों का बाज़ार में बिक सकता है बेशक,
मगर एहसास का दुनिया में कोई बाज़ार नहीं होता।
ये वो दौलत है जो रूह के जल...
मगर एहसास का दुनिया में कोई बाज़ार नहीं होता।
ये वो दौलत है जो रूह के जल...
लफ़्ज़ों को जोड़ना तो बस एक हुनर है दुनिया का,
मगर याद रखना, एहसास की कोई दुकान नहीं होती।
कलेजा चाहिए होता है लफ़्ज़ों म...
मगर याद रखना, एहसास की कोई दुकान नहीं होती।
कलेजा चाहिए होता है लफ़्ज़ों म...
मेरे दिल में गूँजता हुआ, एक सवाल हो तुम,
हकीकत हो मेरी, या सिर्फ एक खयाल हो तुम।
कभी लगता है कि सदियों पुरानी पहचान है...
हकीकत हो मेरी, या सिर्फ एक खयाल हो तुम।
कभी लगता है कि सदियों पुरानी पहचान है...