Ghazal

मेरा वजूद (My Existence) 🔥✊

10 views December 12, 2025
आँधियाँ लाख आएँ, मैं अपनी जगह से हिला नहीं,
मैं वो पेड़ हूँ, जो तूफानों से कभी मिला नहीं।
मेरे सर को झुकाने की हसरत लिए बैठे हैं सब,
मगर मेरी गर्दन में, झुकने का कोई सिलसिला नहीं।

मैं अपनी पहचान किसी के रहम-ओ-करम से नहीं माँगता,
मैंने वो रास्ता चुना ही नहीं, जो मुझे खला नहीं।

मेरे गुमान को मेरा गुरूर मत समझना दुनिया वालों,
ये वो ज़मीर है, जो बाज़ार में बिका नहीं।

गिराने वालों ने एड़ी-चोटी का जोर लगा लिया,
मगर मेरा हौसला, वो पत्थर है जो कभी पिघला नहीं।

ज़िगर शायर अकेला चला था, और अकेला ही काफी है,
मुझे भीड़ का हिस्सा बनने का, कोई गिला नहीं।

More from Ghazal

हुनर लफ़्ज़ों का बाज़ार में बिक सकता है बेशक,
मगर एहसास का दुनिया में कोई बाज़ार नहीं होता।
ये वो दौलत है जो रूह के जल...
​लफ़्ज़ों को जोड़ना तो बस एक हुनर है दुनिया का,
मगर याद रखना, एहसास की कोई दुकान नहीं होती।
​कलेजा चाहिए होता है लफ़्ज़ों म...
मेरे दिल में गूँजता हुआ, एक सवाल हो तुम,
हकीकत हो मेरी, या सिर्फ एक खयाल हो तुम।
कभी लगता है कि सदियों पुरानी पहचान है...