Shayari
पीछे है
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December 12, 2025
हर कोई दौड़ रहा है, एक सराब के पीछे है
असली चेहरा कहाँ है, सब नक़ाब के पीछे है
रूह की सादगी को यहाँ कौन पूछता है
दुनिया तो बस जिस्म की आब-ओ-ताब के पीछे है
न दिन में चैन है किसी को, न रातों में सुकूँ
हर शख़्स एक अधूरे से ख़्वाब के पीछे है
यहाँ दोस्ती और मोहब्बत सब दिखावा हैं
हर रिश्ता अपने नफ़ा-नुक़सान के हिसाब के पीछे है
असली चेहरा कहाँ है, सब नक़ाब के पीछे है
रूह की सादगी को यहाँ कौन पूछता है
दुनिया तो बस जिस्म की आब-ओ-ताब के पीछे है
न दिन में चैन है किसी को, न रातों में सुकूँ
हर शख़्स एक अधूरे से ख़्वाब के पीछे है
यहाँ दोस्ती और मोहब्बत सब दिखावा हैं
हर रिश्ता अपने नफ़ा-नुक़सान के हिसाब के पीछे है
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जो किए ही नहीं कभी मैंने
वो भी वादे निभा रहा हूँ मैं
मुझसे फिर बात कर रही है वो
फिर से बातों में आ रहा हूँ मैं
वो भी वादे निभा रहा हूँ मैं
मुझसे फिर बात कर रही है वो
फिर से बातों में आ रहा हूँ मैं
काँच का तोहफा न देना कभी, रूठ कर लोग 'तोड़' दिया करते हैं,
जो बहुत अच्छे हों, उन्हें अक्सर लोग 'छोड़' दिया करते हैं।
जो बहुत अच्छे हों, उन्हें अक्सर लोग 'छोड़' दिया करते हैं।
मुझे तेरा साथ ज़िन्दगी भर नहीं चाहिए,
बल्कि जब तक तू साथ है, तब तक ज़िन्दगी चाहिए।
बल्कि जब तक तू साथ है, तब तक ज़िन्दगी चाहिए।