Nazm
तुम, मैं और हमारा अनंत प्रेम
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January 1, 1970
तुम मेरे कृष्णा, मैं तुम्हारी राधा,
तुमसे ही जुड़ी है मेरी हर एक बाधा।
संसार के लिए तुम पूजनीय भगवान हो,
पर मेरे लिए... तुम मेरा अभिमान हो।
सुनो...
तुम अगर 'मौन' हो, तो मैं तुम्हारी 'भाषा' हूँ,
तुम अगर 'प्राप्ति' हो, तो मैं 'अभिलाषा' हूँ।
तुम्हारी बांसुरी की उस धुन में जो तड़प है,
वो तड़प नहीं... वो मैं हूँ।
लोग कहते हैं कि हम मिल न सके,
पर उन्हें क्या खबर...
कि विरह में जलकर ही तो कुंदन बनता है सोना,
और प्रेम में 'पा लेने' से ज्यादा बड़ा है,
खुद को किसी में पूरी तरह 'खोना'।
तुम मेरे 'शून्य' हो, और तुम ही मेरा 'विस्तार',
तुमसे ही शुरू मेरा प्रेम, तुम पर ही ख़त्म मेरा संसार।
तो बस इतना जान लो...
कि रुक्मिणी तुम्हारी जिम्मेदारी हो सकती है,
मीरा तुम्हारी भक्त हो सकती है,
पर जो तुम्हारे रोम-रोम में बसी है,
जो तुम्हारे नाम से पहले जुड़कर तुम्हें 'पूरा' करती है...
वो हक़, वो रूह, वो सान्स... सिर्फ़ मैं हूँ।
हाँ, तुम मेरे कृष्णा,
और मैं... सिर्फ़ तुम्हारी, बस तुम्हारी राधा।
तुमसे ही जुड़ी है मेरी हर एक बाधा।
संसार के लिए तुम पूजनीय भगवान हो,
पर मेरे लिए... तुम मेरा अभिमान हो।
सुनो...
तुम अगर 'मौन' हो, तो मैं तुम्हारी 'भाषा' हूँ,
तुम अगर 'प्राप्ति' हो, तो मैं 'अभिलाषा' हूँ।
तुम्हारी बांसुरी की उस धुन में जो तड़प है,
वो तड़प नहीं... वो मैं हूँ।
लोग कहते हैं कि हम मिल न सके,
पर उन्हें क्या खबर...
कि विरह में जलकर ही तो कुंदन बनता है सोना,
और प्रेम में 'पा लेने' से ज्यादा बड़ा है,
खुद को किसी में पूरी तरह 'खोना'।
तुम मेरे 'शून्य' हो, और तुम ही मेरा 'विस्तार',
तुमसे ही शुरू मेरा प्रेम, तुम पर ही ख़त्म मेरा संसार।
तो बस इतना जान लो...
कि रुक्मिणी तुम्हारी जिम्मेदारी हो सकती है,
मीरा तुम्हारी भक्त हो सकती है,
पर जो तुम्हारे रोम-रोम में बसी है,
जो तुम्हारे नाम से पहले जुड़कर तुम्हें 'पूरा' करती है...
वो हक़, वो रूह, वो सान्स... सिर्फ़ मैं हूँ।
हाँ, तुम मेरे कृष्णा,
और मैं... सिर्फ़ तुम्हारी, बस तुम्हारी राधा।
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ये कैसा 'कोहरा' है जो अब छंटता नहीं,
सूरज भी अब इस शहर में निकलता नहीं।
हवाओं में यह कैसी ज़हर की मिलावट है,
साँस लेन...
सूरज भी अब इस शहर में निकलता नहीं।
हवाओं में यह कैसी ज़हर की मिलावट है,
साँस लेन...
तो... आ ही गए।
मेरी कामयाबी की गंध तुम्हें खींच ही लाई, जैसे लाश की महक गिद्धों को ले आती है।
क्या चाहिए?
हिस्सा? हमद...
मेरी कामयाबी की गंध तुम्हें खींच ही लाई, जैसे लाश की महक गिद्धों को ले आती है।
क्या चाहिए?
हिस्सा? हमद...
सुनो शहर...
अब अपने इन ऊँचे मकानों की खिड़कियाँ बंद कर लो,
क्योंकि वह 'शायर',
जो तुम्हारी सड़कों पर लफ़्ज़ ढूंढता फिरता थ...
अब अपने इन ऊँचे मकानों की खिड़कियाँ बंद कर लो,
क्योंकि वह 'शायर',
जो तुम्हारी सड़कों पर लफ़्ज़ ढूंढता फिरता थ...