Ghazal
किरदार निभाना पड़ता है
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December 14, 2025
दर्द दिल में हो मगर होंठों से मुस्कुराना पड़ता है,
इस दुनिया के डर से अपना ग़म छुपाना पड़ता है।
यहाँ कोई नहीं समझता खामोशियाँ किसी की,
हाल-ए-दिल लफ़्ज़ों में सबको बताना पड़ता है।
ये ज़िन्दगी एक रंगमंच है और हम कलाकार,
रोते हुए भी हँसी का किरदार निभाना पड़ता है।
बहुत नाज़ुक होते हैं ये आजकल के रिश्ते,
ये टूट न जाएँ, इसलिए सर झुकाना पड़ता है।
ख्वाहिशें तो और भी थीं जीने की 'साहिल',
मगर ज़िम्मेदारियों के आगे ख्वाबों को जलाना पड़ता है।
इस दुनिया के डर से अपना ग़म छुपाना पड़ता है।
यहाँ कोई नहीं समझता खामोशियाँ किसी की,
हाल-ए-दिल लफ़्ज़ों में सबको बताना पड़ता है।
ये ज़िन्दगी एक रंगमंच है और हम कलाकार,
रोते हुए भी हँसी का किरदार निभाना पड़ता है।
बहुत नाज़ुक होते हैं ये आजकल के रिश्ते,
ये टूट न जाएँ, इसलिए सर झुकाना पड़ता है।
ख्वाहिशें तो और भी थीं जीने की 'साहिल',
मगर ज़िम्मेदारियों के आगे ख्वाबों को जलाना पड़ता है।
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