Ghazal
इंसानियत का आसरा
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December 12, 2025
किसी के ज़ख़्म की कोई दवा होना चाहिए,
बुरे वक़्तों में कोई आसरा होना चाहिए।
ये जो इंसान हैं, टूटे हुए हैं अंदर से,
इन्हें छूने को लहजा नरम होना चाहिए।
जो रोता है, उसे चुप से रुला देना ही बस,
वो आँसू पोंछने वाला भी कोई होना चाहिए।
कोई 'गिरा' है तो 'हँसने' लगी है ये 'दुनिया',
गिरे हुए को 'उठाने' का हौसला होना चाहिए।
वो 'भूखा' है, ये 'परेशान' है, वो 'तनहा' है,
हर एक 'दर्द' का 'अहसास' भी ज़रा होना चाहिए।
है 'नफ़रतों' से ये दुनिया 'जहन्नुम' बन ही चुकी,
दिलों में 'प्यार' का छोटा सा 'घर' बना होना चाहिए।
बुरे वक़्तों में कोई आसरा होना चाहिए।
ये जो इंसान हैं, टूटे हुए हैं अंदर से,
इन्हें छूने को लहजा नरम होना चाहिए।
जो रोता है, उसे चुप से रुला देना ही बस,
वो आँसू पोंछने वाला भी कोई होना चाहिए।
कोई 'गिरा' है तो 'हँसने' लगी है ये 'दुनिया',
गिरे हुए को 'उठाने' का हौसला होना चाहिए।
वो 'भूखा' है, ये 'परेशान' है, वो 'तनहा' है,
हर एक 'दर्द' का 'अहसास' भी ज़रा होना चाहिए।
है 'नफ़रतों' से ये दुनिया 'जहन्नुम' बन ही चुकी,
दिलों में 'प्यार' का छोटा सा 'घर' बना होना चाहिए।
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ये वो दौलत है जो रूह के जल...
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