Ghazal
आसान नहीं होता
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January 1, 1970
हर दर्द-ए-दिल ज़ुबाँ से बयाँ नहीं होता,
मोहब्बत का सफ़र इतना आसान नहीं होता।
हँसी के पीछे छुपा लेती है दुनिया ग़म को,
हर ज़ख्म का जिस्म पर निशान नहीं होता।
ज़मीन वालों की ख्वाहिशें बहुत हैं मगर,
सबके हिस्से में पूरा आसमान नहीं होता।
जो दिल से उतर जाए, वो फिर नहीं मिलता,
टूटे हुए रिश्तों का कोई मकान नहीं होता।
चलो 'राज़' अब खामोशी ही बेहतर है यहाँ,
लफ़्ज़ों से हर जज़्बात का गुमान नहीं होता।
मोहब्बत का सफ़र इतना आसान नहीं होता।
हँसी के पीछे छुपा लेती है दुनिया ग़म को,
हर ज़ख्म का जिस्म पर निशान नहीं होता।
ज़मीन वालों की ख्वाहिशें बहुत हैं मगर,
सबके हिस्से में पूरा आसमान नहीं होता।
जो दिल से उतर जाए, वो फिर नहीं मिलता,
टूटे हुए रिश्तों का कोई मकान नहीं होता।
चलो 'राज़' अब खामोशी ही बेहतर है यहाँ,
लफ़्ज़ों से हर जज़्बात का गुमान नहीं होता।
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मगर एहसास का दुनिया में कोई बाज़ार नहीं होता।
ये वो दौलत है जो रूह के जल...
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मगर याद रखना, एहसास की कोई दुकान नहीं होती।
कलेजा चाहिए होता है लफ़्ज़ों म...
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कभी लगता है कि सदियों पुरानी पहचान है...
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